Assessing the Xi Visit: After the Optics, A Reality Check

Published as जबिन टी. जैकब, ‘नाजुक रिश्तों की नई दिशा’, Dainik Jagran (New Delhi), 20 September 2014, p. 10

Original text in English follows below.

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का तीन दिवसीय भारत दौरा संपन्न होगा। इसे कई कारणों से खासी ख्याति मिली। हालांकि ठोस नतीजों की बात करें तो इससे कोई बहुत महत्वपूर्ण दिशा उभरती दिखाई नहीं दी। सालों से चीन ने जिन चीजों के लिए प्रसिद्धि हासिल की है वे हैं इसकी परियोजनाओं का वृहद आकार, तीव्र महत्वाकांक्षाएं और इन्हें पूरा करने की तेज रफ्तार। इन तमाम मुद्दों पर चीन के राष्ट्रपति का भारत दौरा खरा नहीं उतरता।

शी चिनफिंग और नरेंद्र मोदी, दोनों नेता अपने-अपने देश में मजबूत माने जाते हैं और इसलिए लंबे समय से लंबित सीमा विवाद का राजनीतिक हल निकालने की स्थिति में नजर आते हैं। हालांकि विश्लेषकों ने चीन के राष्ट्रपति की इस यात्रा के दौरान सीमा विवाद पर किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं की थी। हालांकि इस दौरे से आर्थिक मोर्चे पर बड़ी उम्मीदें थीं, क्योंकि यात्रा से पहले मुंबई में चीनी महावाणिज्य दूत ने चीन द्वारा भारत में सौ अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद जताई थी। Continue reading Assessing the Xi Visit: After the Optics, A Reality Check

Sino-Indian Sub-National Economic Ties: Changing the Game

With a still young political leadership in both China and India, economic ties will be a major plank of the India-China relationship. Even as the burgeoning trade deficit for India is a major bilateral problem, the two countries are also trying to lay fresh sinews in their relationship through Chinese-assisted infrastructure development in India. What is also important to note that is that much of these economic interactions are or will be increasingly negotiated at the sub-national level. Continue reading Sino-Indian Sub-National Economic Ties: Changing the Game

Sino-Indian Relations: Beyond Symbolism and Beyond Belligerence

Published as जैबिन टी जैकब, ‘युद्धोन्माद से परे देखें भारत-चीन रिश्ते को’, Business Bhaskar, 13 November 2013.

Original text in English follows below

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अक्टूबर मध्य में चीन की यात्रा और चीनी प्रधानमंत्री ली केक्यांग की मई में भारत की यात्रा पर गौर करें तो यह पहली बार हुआ है कि दोनों देशों के शीर्ष नेता एक ही साल में एक-दूसरे के यहां गए हैं। ली की यात्रा के समय देपसांग में करीब तीन हफ्ते तक जारी घुसपैठ का मामला सामने आया था,

तो सिंह के दौरे के समय दो अरुणाचली तीरंदाजों तीरंदाजों (खिलाडिय़ों) को चीन में एक प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए जाते समय नत्थी वीजा दिए जाने का मामला सामने आया। लेकिन सच तो यह है कि भारत-चीन रिश्ते को न तो इस तरह के प्रतीकवाद और न ही युद्धोन्माद सही मायने में पेश करते हैं।

उदाहरण के लिए यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और चीन जनवादी गणतंत्र के राष्ट्रपति के रूप में शी जिनपिंग का ओहदा ली केक्यांग से ऊंचा है। इसी प्रकार यह तथ्य भी ध्यान रखना चाहिए कि चीनियों ने मनमोहन सिंह का अच्छा स्वागत किया है जिनकी शायद प्रधानमंत्री के रूप में यह अंतिम चीन यात्रा साबित हो।

यह तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि सिंह ऐसी सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो अपने घर में विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रही है, इसे देखते हुए भारत एवं चीन के बीच किसी तरह की सौदेबाजी कठिन और दुष्प्राप्य थी।

दोनों महाशक्तियों के बीच रिश्ते को स्थानीय घटनाओं, क्षेत्रीय पर्यावरण और वैश्विक परिस्थितियों, इन सबका एक साथ असर होता है। Continue reading Sino-Indian Relations: Beyond Symbolism and Beyond Belligerence

China and Pakistan: Towards Increasing Dissonance?

Presentation titled, “Sino-Pak Partnership: Changing Strategically” at International Workshop on Recent Security Challenges in the Asia Pacific and India-China Relations, Institute of Chinese Communist Studies, Taipei, Taiwan, 31 July 2013.

A. an important objective of the Sino-Pak relationship is to keep India off-balance.

a. Sino-Pak military cooperation is the primary method                                 i.      this involves the Chinese sale of conventional weapons  as well as earlier transfers of nuclear weapons

ii.      today, there is also transfer of civilian nuclear technology that can no doubt be put to dual use by Pakistan

iii.      cooperation with the Chinese military further strengthens the Pak military and helps to undermine still further the Pak civilian government’s attempts at putting down deep roots.

iv.      however, could there also be Chinese concerns about Pakistani military capabilities, if not Pakistani reliability in general, given the Abbottabad attack on Osama bin Laden’s hide-out by US special forces?

b. Sino-Pak political cooperation is secondary  Continue reading China and Pakistan: Towards Increasing Dissonance?

A Framework for Understanding Sino-Indian Ties

Presentation titled, ‘India and China:Competition or Cooperation?’ at International Workshop on Recent Security Challenges in the Asia Pacific and India-China Relations, Institute of Chinese Communist Studies, Taipei, Taiwan, 30 July 2013.

Outline

What framework can we use to understand the current Sino-Indian relationship?

A.  two bookends of the relationship

  • the boundary dispute
  • the need for bilateral cooperation to both transform the current global order and to tackle their own internal problems

B.  the regular stuff in the relationship

  • regular ‘incursions’ at the Line of Actual Control
  • frequent high-level visits between leaders

C.  the irregular stuff in the relationship

  • infrequently organized people-to-people exchanges in the form of cultural shows, film festivals, etc.
  • sporadic attempts at military-to-military exchanges

D.  the framework Continue reading A Framework for Understanding Sino-Indian Ties

Candour on the Red Carpet: Parsing the Sino-Indian Joint Statement

Published as जबिन टी. जेकब, ‘चीनी पीएम की यात्रा पर संतुलित रुख’, Business Bhaskar, 22 May 2013, p.4.

(Original in English follows below Hindi text)

देश के पश्चिमी इलाके में मौजूद दपसांग में चीनी ‘घुसपैठ’ की वजह से तीन सप्ताह का गतिरोध खत्म होने के दो सप्ताह बाद चीन के प्रधानमंत्री ली खचियांग भारत की पहली आधिकारिक यात्रा पर यहां पहुंचे। पिछले दिनों की गतिविधियों पर नजर रखने वालों के सामने यह साफ हो गया है कि भारत न तो लद्दाख की घटना की वजह से अपनी जगह से उखड़़ा और न ही ली खचियांग की पहली आधिकारिक यात्रा के दिए गए संकेत से बहुत अधिक प्रभावित दिखा। भारत ने वही किया जो एक परिपक्व, आत्मविश्वास से भरी ताकत करती है।

राजनीतिक और आर्थिक लिहाज से देखें तो चीन के लिए ग्लोबल और स्थानीय स्तर पर अपने कदमों का कोई आकलन करना तब तक मुश्किल है जब तक कि वह यह न जान ले कि भारत अपने हितों को किस तरह देखता है और इसके मुताबिक क्या कदम उठा सकता है। Continue reading Candour on the Red Carpet: Parsing the Sino-Indian Joint Statement

Li Keqiang’s India Visit: Towards Realistic Expectations

(The English version was written on the first day of the Chinese Premier’s visit to India and updated and published originally as जबिन टी. जैकब, ‘भरोसा बढ़ाने वाली भेंट’, Dainik Jagran, 22 May 2013, p. 10 (see below).)

Chinese Premier Li Keqiang is in India on his first overseas visit since taking over his new position in March. The visit is notable for a number of reasons.

One, it came against the backdrop of the recent Chinese ‘incursion’ in the Ladakh region and the resultant stand-off that lasted three weeks. As a result, the mood could have be decidedly indifferent if not unfriendly in terms of the public reception of Li in India.

In the case of high-level visits, however, no matter what the problems and complications in a bilateral relationship, it is always important from a diplomatic point of view to make sure the atmospherics are excellent and that warmth and enthusiasm are on full display. Continue reading Li Keqiang’s India Visit: Towards Realistic Expectations