Tag Archives: CPI (M)

Post-China’s 18th Party Congress: Socioeconomic Challenges Paramount

(original version in English follows below Malayalam text)

ദശാബ്ദത്തിലൊരിക്കല്‍ നടക്കുന്ന നേതൃമാറ്റം പൂര്‍ത്തീകരിച്ച് ചൈനീസ് കമ്യൂണിസ്റ്റ്പാര്‍ട്ടി (സി.പി.സി.)യുടെ 18-ാം കോണ്‍ഗ്രസ് ഈയിടെ ബെയ്ജിങ്ങില്‍ സമാപിച്ചല്ലോ. ഹു ജിന്താവോയ്ക്കുകീഴില്‍ പ്രവര്‍ത്തിച്ച നാലാംതലമുറ നേതൃത്വം ഷി ജിന്‍പിങ്ങിനുപിന്നില്‍ അണിനിരക്കുന്ന അഞ്ചാംതലമുറയ്ക്ക് ചുമതല കൈമാറി. ചൈനയുടെ രാഷ്ട്രീയവും സാമ്പത്തികവും സൈനികവുമായ വളര്‍ച്ചയെ ലോകം ആരാധനയോടെയോ അങ്കലാപ്പോടെയോ നോക്കിക്കാണുമ്പോഴും രാജ്യം നേരിടുന്ന നിരവധി ആഭ്യന്തര വെല്ലുവിളികളിലാണ് സി.പി.സി.യുടെ 18-ാം കോണ്‍ഗ്രസ് ശ്രദ്ധയൂന്നിയത്. Continue reading Post-China’s 18th Party Congress: Socioeconomic Challenges Paramount

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How Red is my Communist?

(original text in English follows below the Hindi text)

माक्र्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी में भारतीय राजनीतिक दलों की सारी खूबियां हैं भी और नहीं भी। मसलन पार्टी में नीतिगत मसलों के नाम पर पार्टी नेताओं को बीच गुटबाजी और आपस में टकराव आम है। दुनिया भर के दूसरे राजनीतिक दलों में भी यह बीमारी है। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी भी इसकी अपवाद नहीं है।

हालांकि सीपीएम जैसी माक्र्सवादी पार्टी अपनी गलतियों को मानने और उसका विश्लेषण करने में दूसरे भारतीय राजनीतिक दलों से ज्यादा सक्षम साबित हुई है। इसके साथ ही वह कुछ राजनीतिक दलों में से एक है जो व्यक्तिगत या वंशवादी नेतृत्व के उलट सामूहिक नेतृत्व में विश्वास दिखाता नजर आता है।

भारतीय राजनीति में कम ही दल सीपीएम की तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर इतना ज्यादा ध्यान केंद्रित करते नजर आते हैं। वास्तव में भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी का 1964 में विभाजन भी चीन-सोवियत के वैचारिक मतभेदों के आधार पर हुआ था। चीनी कम्यूनिस्टों का पक्ष लेने वालों ने माक्र्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी। इसलिए आज यह जानना दिलचस्प होगा कि सीपीएम चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के बारे में क्या सोचती है। आखिर सीपीसी और सीपीएम में क्या समानताएं और असमानताएं हैं। Continue reading How Red is my Communist?